कोटा शहर के डडवाडा क्षेत्र में स्थित महाराष्ट्रीय समाज भवन में अमृत महोत्सव का शुभारंभ नव संवत्सर पर किया जा रहा है. समाज में उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोटा नगर में मराठी भाषी बंधुओं द्वारा श्री गणेशोत्सव मनाने का प्रारंभ सन् 1933 से हुआ. उन दिनो मराठी भाषियों की संख्या बहुत कम थी. अत: उत्सव छोटे स्तर पर ही मनाया जाता था. समाज का अपना कोई भवन भी नही था. उपल्बधता के अनुसार किसी के घर पर श्री गणेश की स्थापना होती थी. कालांतर में कोटा मे रेल मंडल कि स्थापना होने से मराठी भाषिकों की संख्या बढी तथा संस्था का पंजीकरण “ महाराष्ट्रीय समाज ” के नाम से हुआ. इसके बाद संस्था ने भवन के लिए प्रयास शुरु किए . कोटा शहर के डडवाडा क्षेत्र में भूखंड खरीद कर भवन निर्माण प्रारंभ हुआ जो विभिन्न चरणों मे पूर्ण हुआ. आज महाराष्ट्रीय समाज भवन में कार्यालय, दस कमरे, विशाल सभागार तथा रंगमंच है.

वर्ष 2007 में मनाए जाने वाला गणेशोत्सव संस्था का 75 वां गणेशोत्सव होगा. इस अमृत महोत्सव का शुभारंभ नव संवत्सर से प्रारंभ हो कर छत्रपति शिवाजी जयंती 2008 में समापन होगा. इस महोत्सव को महाराष्ट्रीय समाज, डडवाडा कोटा, नूतन महाराष्ट्र समाज सेवा समिति, कोटा शहर, मराठा मंडळ, पुलिस लाइन्स, कोटा तथा श्री गणेश पूजा समिति, रावतभाटा संस्थाएं सामुहिक रूप में मना रहीं हैं.
अमृत महोत्सव के अन्तर्गत वर्ष भर शहर के विभिन्न क्षेत्रों उत्सव आयोजित होंगे. उत्सवों में प्रमुखता से नव संवत्सर (गुढी पाडवा), महाराष्ट्र दिवस, राजस्थान दिवस, श्री गणेशोत्सव, दीपावली स्नेह मिलन, मकर संक्रांति एवम छत्रपति शिवाजी जयंती सामुहिक रूप से मनाए जाएंगे. महोत्सव के दौरान विभिन्न अवसरों पर छोटे बच्चों के लिए, यवा वर्ग के लिए तथा महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. विभिन्न परीक्षाओं में विशिष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरुस्कृत किया जाएगा. समाज के वयोवृध्द व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा. कला एवम् क्रीडा क्षेत्र में उल्लेखित उपलब्धियों हेतु बच्चों एवम युवाओं को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाएगा.
श्री गणेशोत्सव के इस अमृत महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य कोटा तथा कोटा नगर के समीपस्थ क्षेत्रो (कोटा जं., कोटा शहर, रावतभाटा, बूंदी, बारां तथा झालावाड) के मराठी भाषिकों को, उनकी अपनी संस्थाओं को अस्तित्व में रखते हुए , एक मंच पर लाना तथा एक दूसरे की सहायता करते रहने का मूल मंत्र देना है।