शाम को अपनी छत पर खडे हो कर डूबते सूरज को देखिए और सोचिए कि एक दिन हमारा जीवन रूपी सूर्य भी इसी प्रकार डूब जाएगा. डूबते सूर्य को डूबने से कोई नहीं रोक सकता. हमारे जीवन का सूर्य भी तेजी से अस्ताचल की ओर भाग रहा है और इसे अस्त होने से कोई नहीं बचा सकता. प्राकृतिक सूर्य निकलता है तो यह तय होता है कि सुबह होगी - दोपहर होगी - शाम होगी. लेकिन हमारे जीवन रूपी सूर्य का कुछ भी तय नहीं होता. हो सकता है जीवन रूपी सूर्य से दोपहर न हो, शाम न हो. कभी कभी तो जीवन रूपी सूर्य उदय होने से पूर्व ही अस्त हो जाता है।

जीवन का हर पल उत्सव मान कर जीएं ताकि मृत्यु महोत्सव बन सके. हमारे जीवन का सूर्य अस्त हो इससे पूर्व ही ईश्वर रूपी दीपक में सत्कर्मो की बाती, परोपकार रूपी तेल में भिगो कर एक छोटासा दीपक जला लीजिए ताकि मृत्यु रूपी अमावस के अंधेरे को चीर कर जीवन यात्रा सकुशल संपन्न हो सके ।

- संकलित

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प्रेषक : साईट प्रबंधन सोमवार, 19 मार्च 2007 4:23 pm.